Monday, 26 March 2018

क्या आप जानते हैं कि ॐ की ध्वनि से सेहत पर पड़ता हैं शुभ प्रभाव - जरूर पढे पूरा लेख



ओंकार ध्वनि 'ॐ' को दुनिया के सभी मंत्रों का सार कहा गया है।
 यह उच्चारण के साथ ही शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। 
भारतीय सभ्यता के प्रारंभ से ही ओंकार ध्वनि के महत्व से सभी परिचित रहे हैं।
 शास्त्रों में ओंकार ध्वनि के 100 से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं।
 यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है।
 कई बार मंत्रों में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिसका कोई अर्थ नहीं होता लेकिन उससे निकली ध्वनि शरीर पर अपना प्रभाव छोड़ती है।
तंत्र योग में एकाक्षर मंत्रों का भी विशेष महत्व है।
 देवनागरी लिपि के प्रत्येक शब्द में अनुस्वार लगाकर उन्हें मंत्र का स्वरूप दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर कं, खं, गं, घं आदि।

 इसी तरह श्रीं, क्लीं, ह्रीं, हूं, फट् आदि भी एकाक्षरी मंत्रों में गिने जाते हैं। 
सभी मंत्रों का उच्चारण जीभ,होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों से निकलने वाली वायु के सम्मिलित प्रभाव से संभव होता है। 
इससे निकलने वाली ध्वनि शरीर के सभी चक्रों और हारमोन स्राव करने वाली ग्रंथियों से टकराती है।
 इन ग्रंथिंयों के स्राव को नियंत्रित करके बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है।

क्या  करें?
* ओम- प्रातः उठकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। इससे शरीर और मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी। दिल की धड़कन और रक्तसंचार व्यवस्थित होगा।

* ओम नमो- ओम के साथ नमो शब्द के जुड़ने से मन और मस्तिष्क में नम्रता के भाव पैदा होते हैं। इससे सकारात्मक ऊर्जा तेजी से प्रवाहित होती है।
* ओम नमो गणेश- गणेश आदि देवता हैं जो नई शुरुआत और सफलता का प्रतीक हैं। अत: ओम गं गणपतये नम: का उच्चारण विशेष रूप से शरीर और मन पर नियंत्रण रखने में सहायक होता है।

शरीर में आवेगों का उतार-चढ़ाव

शब्दों से उत्पन्न ध्वनि से श्रोता के शरीर और मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है। बोलने वाले के मुँह से शब्द निकलने से पहले उसके मस्तिष्क से विद्युत तरंगें निकलती हैं। इन्हें श्रोता का मस्तिष्क ग्रहण करने की चेष्टा करता है। उच्चारित शब्द श्रोता के कर्ण-रंध्रों के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचते हैं।

प्रिय या अप्रिय शब्दों की ध्वनि से श्रोता और वक्ता दोनों हर्ष, विषाद, क्रोध, घृणा, भय तथा कामेच्छा के आवेगों को महसूस करते हैं। 

अप्रिय शब्दों से निकलने वाली ध्वनि से मस्तिष्क में उत्पन्न काम, क्रोध, मोह, भय लोभ आदि की भावना से दिल की धड़कन तेज हो जाती है जिससे रक्त में 'टॉक्सिक' पदार्थ पैदा होने लगते हैं। इसी तरह प्रिय और मंगलमय शब्दों की ध्वनि मस्तिष्क, हृदय और रक्त पर अमृत की तरह आल्हादकारी रसायन की वर्षा करती है।

होने वाला है कुछ ऐसा कि एक गलती से टूट सकता है सपा और बसपा का गठबंधन !

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का हाल ऐसा रहा कि सपा ने अपने उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचा तो दिया लेकिन गठबंधन के आधार पर बसपा को राज्यसभा की चौखट तक नही पहुंचा पाई. इसके पहले जब ये गठबंधन बना था तब बसपा ने सपा को लोकसभा उपचुनाव में मदद की थी और नतीजा ये रहा था कि सपा के दो सांसद फूलपुर और गोरखपुर से जीते थे लेकिन यह गठबंधन राज्यसभा चुनाव में कुछ खास करामात नहीं दिखा पाया. अब एक बार फिर से अखिलेश यादव को मायावती के विधायकों की जरूरत पड़ेगी. बता दें कि मई में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 12 सीटें खाली हो रही है ऐसे में अब देखना ये है कि क्या अब फिर से सपा का साथ बसपा देगी ?

NBT की खबर के मुताबिक मई के महीने में विधान परिषद की 12 सीटें खाली हो रही हैं, ऐसे में एक बार फिर से सपा और बसपा के गठबंधन की कड़ी परीक्षा होगी. परीक्षा इसलिए भी क्योंकि राज्यसभा में मनमुताबिक नतीजे ना आने की वजह से मायावती को निराशा हाथ लगी है, ऐसे में फिर से बसपा सपा को सपोर्ट करेगी या नहीं इस संशय बना हुआ है. बता दें कि मई में जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री मोहसिन रजा और महेंद्र सिंह के साथ यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव की भी सीट हैं.
हालाँकि जब गठबंधन हुआ था तब बसपा सुप्रीमों मायावती ने पहले ही साफ कर दिया था कि वो सपा को मदद करेंगी लेकिन राज्यसभा चुनाव में बसपा को फायदा ना मिलने से अब उम्मीदें लगाई जा रही हैं कि
 क्या मायावती अपने इस फैसले पर पुनः विचार करेंगी ? बसपा के सूत्रों का कहना है कि “विधान परिषद के चुनावों के लिए अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. हम इसको लेकर बहन जी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. उसके बाद ही ये साफ हो पायेगा कि वो सपा को एमएलसी मदद करेंगे या नहीं.”
अब ऐसे में अगर बसपा ने विधान परिषद् चुनाव में सपा को सपोर्ट नहीं किया तो मुमकिन है कि ये गठबंधन जो मोदी सरकार को हराने का दावा कर रही है, वो खुद टूट जाये. अब देखना ये है कि मई के महीने में होने वाले इस चुनाव को लेकर मायावती कैसा रुख अख्तियार करती हैं.

आखिर सड़कों पर क्या खींची जाती है पीली और सफेद लाइन, जानें इनका मतलब

अक्सर सड़क पर चलते समय हमारा दिमाग सड़क के अलावा सभी जगह के बारे में सोचता है. हर व्यक्ति जो सड़क पर चलता है उसे हर चीज़ पर गौर करना चाहिए. ट्रैफिक रूल्स का पालन करना भी बेहद आवश्यक है. क्या कभी आपने सड़क पर चलते समय थोड़ा सा भी गौर किया है. आप देख सकते हैं कि सड़क पर हमेशा दो प्रकार की लाइन बनी रहती है, जिनमें से एक होती है पीली और दूसरी होती है सफ़ेद.
सड़क पर चलने के दौरान आप लोगो ने जरुर अपने दिमाग से यह प्रश्न किया होगा की आखिर यह लाइन एक जैसी ना होकर अलग- अलग क्यों है. चलिए इसका जवाब हम आपको देते है और आपको विभिन्न प्रकार की सड़क पर बनी लाइनों के बारे में बताते है.
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1. गहरी सफेद लाइन :- इस लाइन का मतलब होता है कि आपको अपनी लेन नहीं बदलनी है, यानी जिस लेन पर चल रहे है उसी पर आगे तक बढ़ते रहें।
2. टूटी हुई सफेद लाइन :- वहीं सड़क के बीचों-बीच एक निश्चित दूरी पर बनी जो सफेद लाइन है वह इस बात का संकेत देती हैं कि यहां से लेन बदले सकते हैं।
3. गहरी पीली लाइन :- इस लाइन के अनुसार पासिंग और ओवरटेकिंग सड़क पर संभव है, पर आपको बिना पीली लाइन को पार किए ही ओवरटेकिंग करना होगा।
इसके साथ-साथ भारत के अलग-अलग राज्यों में इसको लेकर अलग-अलग नियम बनाये जा चुके हैं –
4. गहरी पीली लाइन के साथ एक टूटी हुई पीली लाइन :- अगर आप ब्रोकन लाइन की ओर से ड्राइविंग कर रहे हैं तो आप आसानी से ओवरटेक इस पर कर सकते हैं, लेकिन अगर आप दूसरी तरफ से गाड़ी चला रहे हैं तो आप इस पर ओवरटेक नहीं कर सकते।
5. दो गहरी पीली लाइन :- आप इस लाइन पर पासिंग या ओवरटेक नहीं कर सकते।
6. टूटी हुई पीली लाइन :- इस लाइन पर आप सिर्फ पास कर सकते हैं लेकिन वह भी बहुत सावधानी के साथ।
यह थी कुछ अहम जानकारी जिसे पढ़ कर आपके कुछ प्रश्न जरुर क्लियर हो गये होंगे…!!

Sunday, 25 March 2018

जरूर पढ़ें - खुद को महानायक समझने वाले अन्ना हजारे को जनता ने दिखाया आइना

 अन्ना हजारे को जनता ने दिखाया आइना , सारी जनता हैं अब मोदी जी के साथ 




अन्ना हजारे अब मोदी-मोदी कर रहे है - अन्ना हजारे का कहना है की मोदी के कारण लोग राम लीला मैदान में उनके आन्दोलन में नहीं आ रहे है, अन्ना हजारे के आन्दोलन में अब मात्र 100-150 लोग ही दिखाई देते है, वो भी शायद वो लोग है जो रामलीला मैदान के आसपास घूमते है, और फ्री के भोजन के लिए आ जाते है, अगर आप तस्वीरें देखें तो अधिकतर लोग ऐसे ही दिखाई देंगे 

अन्ना हजारे को लोगों ने जबरजस्त थप्पड़ मारा है, जो खुद को इस देश का महानायक समझ रहे थे, खुद को क्रन्तिकारी घोषित करवाते थे, पर जनता ने अन्ना हजारे को बता दिया की उनकी ये सोच गलत है, और उनकी हैसियत कुछ भी नहीं है, हुआ ये था की 2011 में अन्ना हजारे के साथ लाखों और करोडो की भीड़ थी, तब अन्ना हजारे ने सोचा की ये तो मेरा करिश्मा है 

पर ये बात सच नहीं थी, उस समय अन्ना हारे के साथ लोग इसलिए आ गए थे क्यूंकि देश में कांग्रेस की सरकार थी, सत्ता भ्रष्टाचारियों, अत्याचारियों के पास थी, और इसके खिलाफ जनता जंतर मंतर और राम लीला मैदान में आई थी, जिसे अन्ना ने अपना करिश्मा समझ लिया, जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ आई थी

पर आज वही जनता अन्ना हजारे के साथ नहीं है, और कारण ये है की जनता आज मोदी के साथ है, अन्ना हजारे ये आन्दोलन मोदी के खिलाफ कर रहे है, पर 200 लोग भी अन्ना हजारे के साथ नहीं है, क्यूंकि आज की जनता मोदी के साथ है, और समझ रही है की अन्ना हजारे स्पोंसर किया हुआ आन्दोलन कर रहे है, उनकी बातों में दम नहीं है इसलिए जनता उनके साथ नहीं है 

अन्ना हजारे को अब समझ लेना चाहिए की मोदी के साथ देश की जनता है, और अन्ना हजारे को असल में किसानो की फ़िक्र है तो उनके कर्णाटक सरकार के खिलाफ अनशन करना चाहिए, फिर जनता का भी साथ मिलेगा, क्यूंकि सबसे ज्यादा परेशान तो कर्णाटक का किसान है जहाँ कांग्रेस का राज है 




यदि खो जाए आपका भी फोन, तो जानें, अपने खोये हुए फोन को ढूँढने के आसान से तरीके

कभी किसी दिन आपका फोन खो जाता है और उसे ढूँढने में आप अपना सारा समय लगा देते हैं और जब आप उसे नहीं पाते तो नजदीकी पुलिस स्टेशन पर जाकर उसकी FIR दर्ज करवाते हैं, इससे कुछ लोगों का काम तो बन जाता है लेकिन कुछ का FIR होने के बाद भी रिजल्ट नहीं मिलता, उनका फोन कौन ले गया यह उनके लिए एक सवाल ही बन कर रह जाता है, 


कुछ फोने में एंड्राइड एप्लीकेशन पहले से ही दाल कर रखते हैं ताकि जब फोन चोरी हो जाए तो वे उसे ढूंढ लें,कुछ इसका इन्शुरन्स कराते हैं.यदि यह सब करने के बाद भी आपको आपका फोन न मिले तो आपको घबराने की जरुरत नही है,क्योंकि आज हम आपको इसका बहुत बड़ा समाधान बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद ससे आप अपना फोन ढूंढ सकते हैं.इसके लिए बस आपको थोड़ा धैर्य रखने की जरुरत है.

मान लीजिये कि 1 तारिख को आपका फोन खो जाता है तो उसके लिए सबसे पहले आपको उसका बैलेंस चेक करने की जरुरत है. जैसे की मां लीजिये मेरे पास वोडाफोन का सिम है और वो फोन चोरी हो गया है तो मै एक मोबाइल फोन लूँगा किसी दूसरे का और उससे 9828098140 टाइप करूंगा और इसके बाद भारत का कंट्री कोड 91 टाइप करूंगा और उसके बाद अपना मोबाइल नम्बर दयाल करूंगा. उसके बाद # डायल करूंगा तो मेरा फोन बता देगा कि मेरा कितना बैलेंस है, और उसके बाद उस बैलंस को नोट कर लूँगा.और आपको भी इस प्रोसेस से यही सब जानना है.

मानिये कि आपके सिम कार्ड में 5 रूपये का ही बैलेंस है तो अब आपको 500 या 1000 का बैलेंस उस सिम कार्ड में कराना है, इससे आपको आपके फोन के साथ आपका बैलेंस भी मिल जायेगा.ये बस उस मछली को पकड़ने का चारा है जो हम उस तक डाल रहे हैं.

इसके बाद आपके द्वारा बैलेंस डलवाने के बाद चोर एक बार जरूर बैलेंस चेक करेगा, इस रिचार्ज की प्रक्रिया आपको फोन के चोरी होते ही कराना है.क्योंकि इस बैलेंस को देखते ही चोर का ईमान जरूर डगमगा जायेगा.हमारा यह टारगेट तकरीबन 10 दिन का होगा.


अब हमें दिन भर 3 टाइम तक अपना बैलेंस जरूर चेक करना है और जब यह लगे की हमारे फोन से 1 रूपये का बैलेंस कटा है तो तुरंत कस्टमर केयर को काल करें और पूछे की यह कैसा चार्ज कटा है, और सबसे बड़ी बात आपको किसी से कहने की जरुरत नहीं है कि आप उस फोन को ढूंढ रहे हैं बल्कि यह दिखाना है कि अब हम दुसरा फोन ले चुके हैं,


यदि कंप्यूटर आपको ये बताता है कि सर अपने ही बात की है तो समझिये हमारा 90% प्लान सफल है और अब आपका फोन वापस आ जायेगा, दोस्तों जब ये वेरीफाई हो जाए कि हमारे फोन से ही बात हुई है तो हमें तुरंत 0 नंबर कि सिम निकलवानी है और अपने फोन से *111*2*३*1# डायल करना है इसके बाद पिछले तीन कॉल कि डिटेल आ जाएगी. इससे आपको कुछ ऐसे नंबर भी मिल जायेंगे जो उस चोर ने अपने चोर दोस्त को किये होंगे