Monday, 26 March 2018

मोदी सरकार के खिलाफ क्यों लाया जा रहा है अविश्वास प्रस्ताव, जानिए क्या है पूरी प्रोसेस

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सरकार गिराना मुश्किल है। बीजेपी के खुद के 275 सांसद हैं ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव लाने का क्या मकसद है?








स्पेशल डेस्क. लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के चलते मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं हो सका। सदन में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और एआईएडीएम के सांसदों ने हंगामा किया। इस वजह से कार्यवाही को पहले 12 बजे और उसके बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। कार्यवाही स्थगित होने से पहले राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है। बता दें कि टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन नोटिस दिए हैं। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न मिलने से नाराज टीडीपी पहले एनडीए से अलग हुई और अब सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का सपोर्ट कर रही है।

क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव
यह एक संसदीय प्रस्ताव है जिसे पारंपरिक रूप से विपक्ष संसद में सरकार को हराने या फिर कमजोर करने के लिए रखता है। अविश्वास प्रस्ताव उस वक्त भी लाया जाता है जब किसी पार्टी को लगे की सरकार के पास बहुतम नहीं है या सदन में सरकार विश्वास खो चुकी है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव साबित होने पर सरकार गिर सकती है।
कैसे लाते हैं अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सबसे पहले सभापति को लिखित में सूचना देनी होती है। इसके बाद सभापति को इन्फॉर्म करने वाली पार्टी के किसी सांसद से प्रस्ताव पेश करने के लिए कहते हैं। लेकिन प्रस्ताव एक्सेप्ट हो, इसके लिए जरूरी है कि 50 सांसदों का सपोर्ट हो। इसके बाद वोटिंग कराई जाती है या फिर सपोर्ट करने वाले सांसदों को खड़ा कर गिनती की जाती है।
क्या अभी 50 सांसदों का सपोर्ट है?
अविश्वास प्रस्ताव के सपोर्ट में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस खुलकर सामने आ चुकी हैं। टीडीपी के पास 16 और वाईएसआर कांग्रेस के पास 9 सांसद हैं। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया है। उसके पास 34 सांसद हैं। ऐसे में तीनों पार्टियों के सांसद मिलाकर 59 हो जाते हैं जो कि प्रस्ताव पेश करने के लिए काफी हैं।
क्या मोदी सरकार गिर जाएगी?
अगर बीजेपी का ही कोई सांसद धोखा न दे तो सरकार नहीं गिरेगी। क्योंकि बीजेपी के पास स्पीकर समेत 275 सांसद हैं जो सहयोगियों के बिना अकेले ही सरकार बनाने के लिए काफी है। लोकसभा में कुल 545 निर्वाचित सांसद होते हैं। इस वक्त 5 सांसदों की सीट खाली है। इस वक्त सदन में 540 सांसद हैं। अब बहुमत साबित करने के लिए मौजूदा सांसदों के आधे से ज्यादा सांसद चाहिए। यानी 271 सांसद। जबकि बीजेपी के पास स्पीकर समेत 275 सांसद हैं जो सरकार बनाने के लिए काफी हैं। लोकसभा में दो एंग्लो इंडियन सदस्य भी होते हैं। राष्ट्रपति को लोकसभा में 2 एंग्लो इंडियन को मनोनीत करने का अधिकार हैं।
तो फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने का क्या फायदा है?
अविश्वास प्रस्ताव लाने का सीधा मतलब सरकार को कमजोर साबित करना होता है। वर्तमान में भी यही करने की कोशिश की जा रही है। अविश्वास प्रस्ताव से विपक्षी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ एकजुट होंगी। अविश्वास प्रस्ताव से भले ही सरकार बच जाए लेकिन उसके सामने चुनौतियां बढ़ जाएंगी।
स्पीकर की भूमिका
लोकसभा का स्पीकर तभी अपना मत देता है जब दोनों तरफ से बराबर मतदान हुआ हो। उस वक्त स्पीकर अपना वोट किसी भी एक पक्ष को देकर सरकार बना सकता है।
लोकसभा में सीटों की स्थिति
अभी लोकसभा में बीजेपी के 275 सांसद हैं। कांग्रेस के 48, AIADMK के 37, तृणमूल कांग्रेस के 34, बीजेडी के 20, शिवसेना के 18, टीडीपी के 16, टीआरएस के 11, सीपीआई (एम) के 9, वाईएसआर कांग्रेस के 9, समाजवादी पार्टी के 7, इनके अलावा 26 अन्य पार्टियों के 56 सांसद है। 5 सीटें अभी भी खाली हैं।
सहयोगियों की भूमिका
एऩडीए में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के पास स्पीकर समेत 275 सांसद हैं। उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना के पास 18, रामविलास पासवान की लोक जन शक्ति पार्टी (एलजेपी) के पास 6, अकाली दल के पास 4, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के पास 3, जेडीयू के पास 2, अपना दल के पास 2 और 4 अन्य दलों के सांसद हैं। इन सबमें शिवसेना की भूमिका साफ नहीं है। हो सकता है वो वोटिंग में शामिल न हो। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को लेकर भी संशय की स्थिति बनी रहती है। अपना दल का भी एक सांसद बागी बताया जाता है। ऐसे में पासवान के 6, बादल के चार और नीतीश कुमार के 2 और महबूबा के एक सांसद का वोट पक्का माना जा रहा है।
कैसे गिर सकती है सरकार?
एनडीए की सरकार गिराना मुश्किल है लेकिन अगर बीजेपी के सांसद अंदर ही अंदर खेल कर दें तो एनडीएन के सहयोगी दलों की मदद से मोदी सरकार को अपना बहुमत साबित करना होगा। ऐसे में सवाल की आखिर बीजेपी के सांसद ऐसा क्यों करेंगे। दरअसल बीजेपी के कुछ सांसद कई बार पार्टी में रहकर ही सरकार का विरोध कर चुके हैं। पटना साहिब से सांसद शत्रुध्न सिन्हा, दरभंगा से कीर्ति आजाद, इलाहाबाद के सांसद श्याम चरण गुप्ता, बेगुसराय के सांसद भोला सिंह, ये वो लोग हैं जो बीजेपी में रहकर भी बीजेपी का विरोध कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनके अलावा आधा दर्जन सांसद हैं जो नाखुश बताए जाते हैं। यानी अगर 10 सांसद भी बागी हो गए तो बीजेपी का आकड़ा 264 पर आ जाएगा। यानी पार्टी अपने दम पर बहुमत साबित नहीं कर पाएगी।

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